मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड क्यों खाते है?

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मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड क्यों खाते है

मकर संक्रांति, जिसे विशेषकर भारतीय क्षेत्र में मकर सांक्रांति कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है जो सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करने का समय है। इसे भारतीय पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को मनाया जाता है।

मकर संक्रांति के दिन तिल (सेसेम सीड) और गुड़ (जग्गरी) का सेवन करना एक प्रचलित परंपरा है, और इसे “तिल-गुड़” कहा जाता है। इसमें विशेष धार्मिक और भौतिक महत्व होता है:

  1. धार्मिक महत्व:
    • मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ का सेवन करना हिन्दू धर्म में एक पौराणिक रूप से महत्वपूर्ण रीति-रिवाज है। इसे सूर्य देवता की कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
  2. भौतिक महत्व:
    • तिल और गुड़ में उच्च मात्रा में ऊर्जा होती है और इसे शीतल, उर्जावान, और पुष्टिदायक माना जाता है। ठंडी सीसन में इन्हें खाना शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है।
  3. शास्त्रीय सिद्धांत:
    • वेदों और आयुर्वेद में तिल को सेहत के लाभ के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। तिल में विभिन्न पोषण तत्व होते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।
  4. सौर शक्ति:
    • मकर संक्रांति एक सौर पर्व है जिसे सूर्य की ऊर्जा की बढ़ती चारक रश्मियों के अनुसार मनाया जाता है। तिल का सेवन सूर्य की ऊर्जा को बढ़ावा देता है और शरीर को सौर शक्ति से युक्त करता है।
  5. पौराणिक कथा:
    • एक पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्यपुत्र शनि देवता ने अपने पिता सूर्य देव की आराधना के लिए तिल का सेवन किया था। इसलिए मकर संक्रांति पर तिल का सेवन करना शुभ माना जाता है।

इस प्रकार, तिल और गुड़ का सेवन मकर संक्रांति पर एक आदर्श परंपरा है जो धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।