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Sunday, June 16, 2024

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सुबह के सूरज की रोशनी से त्वचा को ये होते हैं फायदे!

दोस्तों, अपनी त्वचा का ख्याल तो हर इंसान रखना चाहता है।हर किसी को सुंदर और अच्छा दिखना होता है जिसके लिए हमलोग बाजारों में उपलब्ध न जाने कितने केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते है जो टेम्पररी खूबसूरती तो दे देती है लेकिन आगे चलकर इसका भारी नुकसान हमारे स्किन के साथ ही साथ स्वास्थ्य को भी उठाना पड़ता है।

सुबह के सूरज की रोशनी से त्वचा को ये होते हैं फायदे!

लेकिन क्या आपको पता है कि आप घर बैठे भी प्राकृतिक तरीकों से अपने त्वचा को खूबसूरत और हेल्थी बना सकते है। आज हम आपको एक ऐसे ही एक तरीक़े के बारे में बताने वाले है जिससे आपके त्वचा को अनगिनत फायदे होते है। आज हम आपको सुबह के सूरज की रोशनी से त्वचा को होने वाले फायदों के बारे में बताने वाले है

एक्जिमा से निजाद

बहुत सारे लोग ऐसे है जो कि एक्जिमा जैसी स्किन प्रॉब्लम के भी शिकार होते है और लाख कोशिशों के बावजूद भी इससे छुटकारा नही ले पाते है लेकिन सुबह के सूरज की रोशनी से आप सिर्फ आधे घण्टे बैठने मात्र से एक्जिमा जैसी कई त्वचा संबंधित समस्याओं से छुटकारा पा सकते है। सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणें  एक्जिमा को ठीक करने में सहायक होती है।

ग्लोइंग त्वचा

ग्लोइंग त्वचा किस व्यक्ति को नही चाहिए परंतु इसके लिए आपको हानिकारक प्रोडक्ट्स लगाने की जरूरत बिल्कुल भी नही है बल्कि आप अगर सिर्फ सुबह की धूप में बैठ जाएं तो शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है जिससे हमारे चेहरे पर प्राकृतिक रूप से ग्लो आ जाता है तो अगर आप भी अपनी डल त्वचा में निखार पाना चाहते है तो रोजाना सुबह के सूरज की रोशनी में जरूर बैठे। 

मानसिक विकारों से त्वचा का बचाव

आजकल की इस स्ट्रेस से भरी लाइफ में लोगों में डिप्रेशन की समस्या पाया जाना , एक आम बात बन गई है, जिसके लिए लोग डॉक्टर के पास दौड़ते रह जाते है । डिप्रेशन का असर आपके त्वचा पर भी देखने को मिलता है जिससे आंखों के नीचे डार्क सर्कल बनना जैसे कई त्वचा से संबंधित कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होने लग जाती है।  शायद आपको यह सुनकर हैरानी होगी कि सुबह के सूर्य की रोशनी में बैठकर योगा करने से न आप इन मानसिक विकारों से बच सकते है बल्कि आपकी त्वचा को भी पर्याप्त मात्रा में विटामिन मिल पाता है जिससे त्वचा में निखार तो आता ही है और साथ ही डिप्रेशन जैसे विकारों से छुटकारा मिलता भी और आप पॉजिटिव महससू करते है।

हार्मोनल एक्ने से रिलीफ  

हार्मोनल असुंतलन के कारण उत्पन्न होने वाली एक्ने की समस्या से आजकल हर कोई परेशान है जिससे आपको सूर्य की किरणें छुटकारा दिला सकती है। इसके लिए आपको सुबह जल्दी उठकर सुबह के सूर्य की रोशनी में कुछ देर बैठना होता है । इससे आपका सारा कार्य सिस्टेमेटिक तरीके से होता है और जल्दी उठने से आपका पाचनतंत्र भी सही रहता जिसके वजह से आपका हार्मोनल हेल्थ सही रहता है। अगर आप रोजना सुबह सुबह सूर्य की रोशनी में बैठते है तो आप हार्मोनल एक्ने जैसी समस्याओं से छुटकारा पा सकते है।

गर्मी से बचने के कुछ घरेलू तरीके

जैसे-जैसे सूरज अपनी तीव्रता बढ़ाता है, वैसे-वैसे गर्मी का प्रकोप भी बढ़ने लगता है। लू, पसीना, थकान और चिड़चिड़ापन – ये सब गर्मी के मौसम के आम लक्षण हैं। ऐसे में ठंडक और ताजगी का अनुभव करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन घबराइए नहीं! प्रकृति ने हमें गर्मी से बचने के लिए कई अद्भुत उपहार दिए हैं, जो हमारे घरों में ही मौजूद हैं।

यह ब्लॉग घरेलू उपायों का खजाना है, जो आपको गर्मी से राहत दिलाने में मदद करेगा। इन सरल और किफायती तरीकों से आप न केवल ठंडक का आनंद ले पाएंगे, बल्कि अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रख पाएंगे।

गर्मी से बचने के कुछ घरेलू तरीके

पानी:

  • खूब पानी पिएं: यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। प्यास लगने से पहले ही पानी पीते रहें। नारियल पानी, छाछ, और नींबू पानी भी पी सकते हैं।
  • गीले कपड़े से नहाएं: दिन में दो बार नहाएं, गुनगुने या ठंडे पानी से। गीले कपड़े से सिर और गर्दन पोंछते रहें।
  • ठंडे पानी से पैर धोएं: यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है।

कपड़े:

  • ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें: काले रंग के कपड़े गर्मी को सोखते हैं।
  • टोपी पहनें: यह आपके सिर और चेहरे को धूप से बचाएगा।
  • धूप का चश्मा पहनें: यह आपकी आंखों को धूप से बचाएगा।

घर:

  • घर को ठंडा रखें: सुबह जल्दी और शाम को खिड़कियां खोलें। पर्दे और अंधेरे का इस्तेमाल करें। पंखे और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करें, लेकिन ज़्यादा ठंडा न करें।
  • गर्मी के दौरान खाना पकाने से बचें: जब बाहर गर्मी ज़्यादा हो तो सुबह या शाम को खाना पकाएं।
  • बिजली के उपकरणों का कम इस्तेमाल करें: बल्ब और अन्य बिजली के उपकरण गर्मी पैदा करते हैं।

खाना:

  • हल्का और पौष्टिक भोजन खाएं: फल, सब्जियां, दही और छाछ का सेवन करें।
  • तेलीय और मसालेदार भोजन से बचें: यह आपको पसीना ज़्यादा करवा सकता है।
  • ठंडी चीजें खाएं: दही, खरबूजा, तरबूज और आइसक्रीम जैसी ठंडी चीजें खाएं।

अन्य:

  • बाहर निकलने से बचें: जब बाहर धूप ज़्यादा हो तो घर के अंदर रहें।
  • शारीरिक गतिविधि कम करें: सुबह या शाम को व्यायाम करें जब मौसम ठंडा हो।
  • धूम्रपान और शराब से बचें: यह आपको डिहाइड्रेट कर सकता है।

इन घरेलू उपायों के अलावा, आप डॉक्टर से भी सलाह ले सकते हैं, खासकर यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है।

यहां कुछ अतिरिक्त सुझाव दिए गए हैं:

  • अपने घर के पौधों को पानी दें: पौधे वाष्पीकरण द्वारा हवा को ठंडा करने में मदद करते हैं।
  • गीली चादर या तौलिया बिछाकर सोएं: यह आपको रात में ठंडा रखने में मदद करेगा।
  • एरोमाथेरेपी का इस्तेमाल करें: पुदीना, लैवेंडर और नीलगिरी जैसे आवश्यक तेल तनाव और चिंता को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो गर्मी में बढ़ सकते हैं।

मुझे उम्मीद है कि ये उपाय आपको गर्मी से बचने में मदद करेंगे! आइए, मिलकर गर्मी को मात देकर इस मौसम का भरपूर आनंद लें!

स्कूल में बच्चों का दिमाग तेज करने के लिए घरेलू उपाय

स्कूल में बच्चों का दिमाग तेज करने के लिए घरेलू उपाय

बच्चों के विकास में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। और शिक्षा ग्रहण करने के लिए एक तेज दिमाग होना ज़रूरी है। कई माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करें और उनका दिमाग तेज हो। इसके लिए आप कुछ घरेलू उपाय अपना सकते हैं:

1. पौष्टिक भोजन:

  • नाश्ता: बच्चों को नाश्ता ज़रूर खिलाएं। नाश्ते में उन्हें फल, दूध, अंडे, ओट्स आदि खिलाएं।
  • संतुलित आहार: बच्चों को संतुलित आहार खिलाएं जिसमें हरी सब्जियां, फल, दालें, रोटी, चावल, और डेयरी उत्पाद शामिल हों।
  • ड्राई फ्रूट्स: बच्चों को रोज़ाना बादाम, अखरोट, किशमिश, और खजूर जैसे ड्राई फ्रूट्स खिलाएं।
  • पानी: बच्चों को खूब पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करें।

2. नींद:

  • पर्याप्त नींद: बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। छोटे बच्चों को 10-12 घंटे और बड़े बच्चों को 8-9 घंटे की नींद की ज़रूरत होती है।
  • शांत वातावरण: बच्चों को सोने के लिए शांत और अंधेरे वातावरण का प्रबंध करें।

3. मानसिक गतिविधियाँ:

  • पढ़ाई: बच्चों को नियमित रूप से पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें उनकी रुचि के अनुसार किताबें और कहानियां दें।
  • खेल: बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रखने के लिए उन्हें खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। बुद्धिमानी वाले खेल जैसे शतरंज, सुडोको आदि खेलें।
  • गणितीय खेल: बच्चों को गणितीय खेल जैसे पहेलियाँ, सुडोको आदि खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • कला और संगीत: बच्चों को कला और संगीत सीखने के लिए प्रोत्साहित करें। यह उनकी रचनात्मकता और कल्पना शक्ति को बढ़ाने में मदद करेगा।

4. अन्य:

  • तनाव कम करें: बच्चों में तनाव उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता को कम कर सकता है। योग, ध्यान, या गहरी सांस लेने के व्यायाम से उन्हें तनाव कम करने में मदद करें।
  • सकारात्मक माहौल: बच्चों को सकारात्मक और प्रोत्साहन देने वाला माहौल प्रदान करें। उनकी प्रशंसा करें और उनकी गलतियों से सीखने में उनकी मदद करें।
  • नियमित व्यायाम: बच्चों को नियमित रूप से व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित करें। यह उनके रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है और मस्तिष्क को ऑक्सीजन प्रदान करता है।
  • बाहर का समय: बच्चों को हर दिन कुछ समय बाहर खेलने या प्रकृति में घूमने के लिए दें।

इन घरेलू उपायों के अलावा, आप बच्चों को डॉक्टर से भी सलाह दिला सकते हैं। डॉक्टर आपके बच्चे की ज़रूरतों के अनुसार उचित सलाह और मार्गदर्शन दे सकते हैं। यह वही याद रखना महत्वपूर्ण है कि हर बच्चा अलग होता है और उसकी अपनी सीखने की गति होती है। अपने बच्चे की तुलना दूसरों से न करें और उसे उसकी क्षमता के अनुसार विकसित होने दें।

गर्मी में बारिश: फायदे और नुकसान

गर्मी में बारिश: फायदे और नुकसान

गर्मी के मौसम में बारिश का आना एक अद्भुत अनुभव होता है। यह तन-मन को ठंडक प्रदान करती है और धरती को हरा-भरा बना देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्मी में होने वाली बारिश के कुछ फायदे और नुकसान भी होते हैं?

फायदे:

  • तापमान में गिरावट: बारिश होने से तापमान में गिरावट आती है, जिससे गर्मी से राहत मिलती है।
  • सूखे से राहत: बारिश से फसलों और पेड़-पौधों को पानी मिलता है, जिससे सूखे से राहत मिलती है।
  • भूजल स्तर में वृद्धि: बारिश का पानी जमीन में समाकर भूजल स्तर को बढ़ाता है।
  • वायु प्रदूषण में कमी: बारिश से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण कम होता है।
  • नदियों और तालाबों में पानी का स्तर बढ़ना: बारिश से नदियों और तालाबों में पानी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे जल संकट कम होता है।

नुकसान:

  • बाढ़: तेज बारिश से बाढ़ आ सकती है, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है।
  • बीमारियां: बारिश के पानी में जमा होने से मच्छरों का प्रजनन बढ़ता है, जिससे मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियां फैल सकती हैं।
  • फसलों को नुकसान: तेज बारिश और तूफान से फसलों को नुकसान हो सकता है।
  • यातायात में बाधा: तेज बारिश से सड़कों पर जलभराव हो जाता है, जिससे यातायात में बाधा होती है।
  • भूस्खलन: पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से भूस्खलन हो सकता है।

गर्मी में बारिश के फायदे और नुकसान दोनों हैं। हमें इन दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बारिश का आनंद लेना चाहिए। हमें सावधानी बरतनी चाहिए और बारिश से होने वाली समस्याओं से बचने के लिए आवश्यक उपाय करना चाहिए।

पहली बारिश में होने वाली बीमारियाँ और उनसे बचने के घरेलू तरीके

बारिश का मौसम – खुशियों और राहत का मौसम। लेकिन इसी के साथ कई बीमारियां भी आ जाती हैं। पहली बारिश में मौसम में अचानक बदलाव होता है, जिससे हमारे शरीर को ढलने में समय लगता है। इस वजह से सर्दी, खांसी, बुखार, टाइफाइड, मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

पहली बारिश में होने वाली बीमारियाँ और उनसे बचने के घरेलू तरीके

इन बीमारियों से बचने के लिए हम कुछ घरेलू तरीके अपना सकते हैं:

1. इम्यूनिटी बढ़ाएं:

  • हल्दी वाला दूध: हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। हर रात सोने से पहले एक गिलास हल्दी वाला दूध पीएं।
  • काढ़ा: तुलसी, अदरक, काली मिर्च और जीरा मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से इम्यूनिटी मजबूत होती है।
  • विटामिन सी: संतरा, नींबू, मौसमी जैसे विटामिन सी से भरपूर फल खाएं।

2. स्वच्छता का ध्यान रखें:

  • बार-बार हाथ धोएं: साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोने से संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है।
  • गीले कपड़े न पहनें: गीले कपड़े पहनने से सर्दी और बुखार हो सकता है। बारिश में भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदल लें।
  • घर का खाना खाएं: बाहर का खाना खाने से बचें, क्योंकि इसमें संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।

3. पानी:

  • खूब पानी पीएं: पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है और टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है। दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीएं।
  • गर्म पानी पीएं: ठंडे पानी की जगह गर्म पानी पीने से सर्दी और खांसी दूर होती है।

4. आराम:

  • पर्याप्त नींद लें: नींद से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। हर रात 7-8 घंटे की नींद जरूर लें।
  • तनाव कम करें: तनाव से इम्यूनिटी कमजोर होती है। योग, ध्यान या अपनी पसंद की कोई गतिविधि करके तनाव कम करें।

इन घरेलू उपायों के अलावा, यदि आपको कोई लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। पहली बारिश का आनंद लें, बीमारियों से बचें और स्वस्थ रहें!

धूम्रपान छोड़ने का आसान तरीका

धूम्रपान की आदत आसानी से नहीं जाती है। खासकर जब आदत बहुत पुरानी होती है। धूम्रपान की आदत शरीर के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंचाती है। श्वासनली की प्रकृति बहुत कोमल होती है। वायुमार्ग में कई कोशिकाएं होती हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण करती हैं। बार-बार धूम्रपान उन कोशिकाओं को जला देता है। इस तरह से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होने लगती है। अत्यधिक धूम्रपान शरीर में कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बनता है। इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया जैसी समस्याएं भी होती हैं।

धूम्रपान छोड़ने का आसान तरीका

क्या आप जानते हैं आपके धूम्रपान करने से आपके आसपास के लोगों को भी नुकसान होता है?

धूम्रपान से स्वास्थ्य के जोखिम बढ़ते हैं। इसी तरह बार-बार धूम्रपान के कारण आसपास के लोगों का स्वास्थ्य भी खराब होता है। इसलिए धूम्रपान छोड़ कर खुद को और अपने आसपास के लोगों को स्वस्थ रखें।

धूम्रपान से बचने के लिए क्या-क्या करना चाहिए आइए जानते हैं-

अपने खाने की आदतों और जीवन शैली को बदलें

एक शोध से पता चला है कि मांसाहारी भोजन करने के बाद धूम्रपान करने की इच्छा और अधिक हो जाता है। इसलिए अगर आप धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, तो आप कुछ दिनों के लिए अधिक फल और सब्जियां खा सकते हैं। नियमित रूप से व्यायाम करें। आप अधिक योग कर सकते हैं, खासकर प्राणायाम। नियमित व्यायाम आपको धूम्रपान से दूर रखेगा।

शराब से दूर रहें

शराबी अक्सर धूम्रपान के बाद शीतल पेय, चाय या कॉफी पीते हैं। यदि आप धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, तो पहले इस प्रकार के पेय को पीने से बचें।

आप अपनी पसंद की चॉकलेट खा सकते हैं

चॉकलेट खाकर अपनी धूम्रपान की आदतों को बदलें। अगर आप चॉकलेट या च्युइंग गम खाने की आदत डाल लेंगे, तो आप धूम्रपान में रुचि खो देंगे।

एक चिकित्सक से परामर्श लें

बेहतर या बदतर आदत को तोड़ने में समय लगता है। यदि आप स्वयं धूम्रपान नहीं छोड़ सकते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श करना सुनिश्चित करें।

अपनी लालसा के विषय में जानने की कोशिश कीजिए 

नशा इंसान का पीछा नहीं करता। बल्कि इंसान नशा का पीछा करता है। आपका एक लालसा 5 मिनट तक चल सकता है। इस नशा से हार मानने से पहले, 5 मिनट की रणनीतियों की एक सूची बनाएं।

उदाहरण के लिए, आप एक मिनट के लिए पार्टी छोड़ सकते हैं, नृत्य कर सकते हैं या बार में जा सकते हैं।

फिर इस बारे में सोचें- धूम्रपान और शराब का संयोजन आपके मुंह के कैंसर के खतरे को 38 गुना बढ़ा देता है। इसलिए बार-बार सिगरेट पीने की आदत से खुद को मुक्त कर दीजिए।

धूम्रपान ना करने वाले दोस्त बनाएं

जब आप किसी पार्टी में हों, तो धूम्रपान ना करने वालों के साथ रहें। “जब आप धूम्रपान करने वालों को देखते हैं, तो उनसे ईर्ष्या ना करें।”

धूम्रपान करने वाले लोगों से दोस्ती करेंगे। तब धूम्रपान की आदत कभी भी आपकी नहीं छूटेगी। वहीं अगर आप धूम्रपान करने वाले लोगों से दोस्ती करेंगे। तो आपकी धूम्रपान की आदत धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।

निष्कर्ष

जो लोग युगों-युगों से धूम्रपान करते हुए आ रहे हैं।वह लोग धूम्रपान छोड़ दे ऐसा हो नहीं सकता। हालांकि जो लोग खुद को सच में सुधारना चाहते हैं। वो लोग अपने धूम्रपान की आदत को खत्म कर देते हैं आसानी से। धूम्रपान से बहुत तरीके के रोग होते हैं। इसलिए इसकी लत ना ही लगे तो ही अच्छा है।

तुलसी की पत्तियों के चमत्कारिक उपयोग

तुलसी :- हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा महत्व तुलसी के पौधे को दिया जाता है। पौराणिक महत्व के अनुसार तुलसी की पत्तियां औषधि के लिए भी उपयोग की जाती हैं। तुलसी का प्रयोग सबसे ज्यादा लड्डू गोपाल जी यानी कृष्ण जी के भोग में इस्तेमाल किया जाता है। 

तुलसी की पत्ती के जरिए बहुत सारी बीमारियों का इलाज किया जाता है। जैसे कि सर्दी, खांसी से लेकर कई बड़ी और भयंकर बीमारियों में तुलसी का पौधा बहुत ही ज्यादा असरदार होता है। 

तुलसी केवल बीमारियों के लिए ही नहीं बल्कि वास्तु दोष के लिए भी शुभ मानी जाती है, तो आइए आज हम आपको तुलसी की पत्तियों के चमत्कारिक उपयोग बताते हैं और यह भी बताते हैं, कि तुलसी का पौधा घर में रखना कितना ज्यादा शुभ होता है और तुलसी का क्या महत्व होता है।

तुलसी की पत्तियों का उपयोग

सबसे पहले हम आपको बीमारी से जुड़े हुए कुछ इलाज बताते हैं, जो तुलसी की पत्तियों से ही ठीक हो जाते हैं।

  • यौन रोगों के इलाज के लिए

अगर पुरुष के शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है तो उसके लिए तुलसी के बीज का इस्तेमाल बहुत ही लाभदायक होता है। इसी के साथ यौन दुर्बलता और नपुसंकता में भी तुलसी के बीज का नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

  • अनियमित पीरियड की समस्या के लिए

अक्सर यह महिलाओं में पीरियड को लेकर समस्या देखी जाती है तो तुलसी के पत्तों के जरिए अनियमितता की शिकायत दूर हो जाती है। अगर इसके लिए तुलसी के बीज का सेवन किया जाए तो वह बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि मासिक चक्र की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के पत्तों को लाभदायक माना जाता है।

  • सर्दी और खांसी

अगर आप सर्दी से ग्रस्त हैं या फिर आपको हल्का सा बुखार है तो इसके लिए मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते को पानी में अच्छी तरह से उबाल लें और उसका काढ़ा बना लें। इसका काढ़ा पीने से बहुत ही फायदा मिलता है अगर आप चाहे तो इसकी गोलियां बना सकते हैं और उसका भी सेवन कर सकते हैं।

  • दस्त होने पर तुलसी का प्रयोग

कई बार मौसम बदलने की वजह से दस्त लग जाते हैं। इसके लिए तुलसी के पत्ते बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होते हैं। इसके लिए आप तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाकर अच्छी तरह से पीस लें। इसके बाद इसे दिन में तीन से चार बार चाटे ऐसा करने से दस्त जल्द ही रुक जाते हैं।

  • सांस की दुर्गंध

कई बार हमारे मुंह से दुर्गंध आने लगती है। इसके लिए तुलसी के पत्ते बहुत ज्यादा फायदेमंद होते हैं और यह नेचुरल इलाज होता है। इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होता। अगर आपके मुंह में बदबू आ रही है तो इसके लिए आप तुलसी के कुछ पत्तों को चबा चबा कर खाएं। अगर आप ऐसा करते हैं तो दुर्गंध जल्द ही खत्म हो जाती है।

  • चोट लगने पर

खेलते कूदते समय अगर कहीं चोट लग गई है तो इसके लिए तुलसी के पत्ते को फिटकरी के साथ मिलाकर चोट पर लगा ले, घाव जल्दी से ठीक हो जाता है, क्योंकि तुलसी में एंटीबैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जिसके जरिए घाव पता नहीं है और जलन भी नहीं होती है।

  • चेहरे पर चमक लाने के लिए

अगर आप त्वचा से संबंधित रोग का सामना कर रहे हैं तो इसके लिए तुलसी फायदेमंद होती है। तुलसी का इस्तेमाल करने से कील मुंहासे जल्द ही खत्म हो जाते हैं और चेहरा निखर जाता है।

  • कैंसर के इलाज के लिए

कई शोध के अनुसार यह बताया गया है कि कैंसर के इलाज के लिए तुलसी बहुत ही फायदेमंद होती है। हालांकि अभी इस बात की पूरी तरह से पुष्टि नहीं की गई है।

  • तुलसी की चाय

अगर आप चाय बनाते वक्त उसमें कुछ तुलसी के पत्ते डाल लेते हैं और उस चाय को अच्छे से उबाल लें। इसके बाद इस चाय का सेवन करें तो आपका जुखाम जल्द ही खत्म हो जाता है।

  • तुलसी का रस

तुलसी का रस सर्दी जुकाम के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होता है। इसके लिए आप तुलसी के 5 से 7 पत्ते लें और उसका रस अच्छी तरह से निकाल ले। इसके बाद दो से तीन बार इस रस का सेवन करें जल्द ही आराम मिल जाता है।

  • तुलसी का दूध

अगर आप बुखार से पीड़ित है तो इसके लिए एक गिलास दूध में तुलसी के कुछ पत्ते और थोड़ा सा दालचीनी पाउडर डालकर उबाल लें और इसका सेवन करें जल्द ही बुखार में आराम मिलता है।

अन्य प्रयोग

जैसा कि हमने आपको ऊपर भी बताया था कि तुलसी की पत्तियां वास्तु दोष के लिए भी शुभ मानी जाती है। इसके लिए केवल कुछ उपाय करने होते हैं और घर की समस्याओं को दूर करने के लिए तुलसी बहुत ही फायदेमंद होती है।

  • घर में अगर अनबन हो रही है या आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है तो नियमित रूप से तुलसी में जल चढ़ाना चाहिए।
  • अगर आप कोई इच्छा पूरी करना चाहते हैं तो इसके लिए इच्छा को सोचकर तुलसी पर एक पीला धागा बांध ले और इस धागे में 108 बार गांठ लगा दें। आपकी मनोकामना जल्दी पूरी हो जाएगी। जब मनोकामना पूरी हो जाए तो इस धागे को निकालकर जल में बहा दें।
  • अगर आपके घर में नेगेटिविटी बहुत ही ज्यादा है तो पूजा में तुलसी का प्रयोग जरूर करें। इसी के साथ सोने से पहले अपने तकिए के नीचे 5 तुलसी के पत्ते रखकर सो जाएं घर में सभी प्रकार की नेगेटिविटी दूर हो जाएगी।
  • आर्थिक समस्या को दूर करने के लिए तुलसी की चार पत्तियों को तोड़ ले। इसके बाद पीतल के बर्तन में पानी डालकर पत्तियों को भिगो दें, 24 घंटे बाद पानी में रखने के बाद उस पानी को पूरे घर में छिड़के, घर के मुख्य दरवाजे पर जरूर छिड़के, इससे किस्मत जल्द ही चमक जाती है और धन की कमी नहीं रहती।

निष्कर्ष

इस आर्टिकल में हमने आपको इस बारे में जानकारी दी है कि आप तुलसी का किस-किस प्रकार से उपयोग कर सकते हैं। तुलसी का प्रयोग बीमारी में तो किया ही जाता है इसी के साथ वास्तु दोष को ठीक करने के लिए भी तुलसी का प्रयोग बहुत ही ज्यादा किया जाता है।

 सुख समृद्धि लाने के लिए तुलसी का पौधा घर में जरूर लगाएं इसी के साथ नियमित तौर पर तुलसी की पूजा भी करें।

तांबे के बर्तन में खाने-पीने के हैं अनगिनत फायदे

स्वस्थ रहने के लिए हम सभी को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। हालांकि, ज्यादातर लोग पानी पीने के लिए या तो स्टील का या कांच के गिलास का उपयोग पानी पीने के लिए करता है। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि पानी पीने के लिए ना ही स्टील सही है और ना ही कांच। अब सवाल यह उठता है कि आखिर व्यक्ति पानी पिएं तो कैसे पिएं?

तांबे के बर्तन का राज़

प्राचीन काल से ही हम पीने के पानी को तांबे के बर्तन में रखने की आदी रहे हैं। ताकि इसके सेवन से अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सके। हालांकि बीच में हम इस तरह की प्रथाओं से हम भटक गए थे, लेकिन देर से ही सही, चीजें फिर से बदलने लगी हैं और हम सभी सुपर हेल्थ के प्रति जागरूक हो गए हैं। इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-कार्सिनोजेनिक, एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं।

तांबे से जुड़ा राज-

उच्च रक्तचाप को कंट्रोल करता है

शरीर में कॉपर का स्तर कम होने से ब्लड प्रेशर असंतुलित हो जाता है। इस दुनिया में आजकल हर 10 लोगों में से सात लोगों को हाई प्रेशर की बीमारी है। तांबे की पर्याप्त उपस्थिति कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने के लिए जानी जाती है, जिससे उच्च रक्तचाप की समस्या दूर रहती है।

पाचन के लिए अच्छा है

तांबे के बर्तन में पानी पीने से पाचन क्रिया तेज होती है। ऐसा एक्सपोर्ट मानते हैं। यह बात सच है कि विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करता है, खराब बैक्टीरिया को मारता है, पेट की सूजन को कम करता है, चयापचय में सुधार करता है। बस यह सुनिश्चित करें कि गर्म पानी न डालें, या तांबे के बर्तन में नींबू पानी जमा न करें। सादा पानी तांबे की बोतल में भरकर ही पिएं।

शरीर पर उम्र बढ़ने के प्रभाव को कम करता है–

कॉपर एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और कोशिकाओं को पुन: जिंदा करने के लिए जाना जाता है। यह मुक्त कणों के हानिकारक प्रभावों से लड़ने में मदद करता है, जिससे उम्र बढ़ने की समस्याओं का ख्याल रखा जाता है। तांबे में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में बाधा डालने के जादुई गुण होते हैं।

संक्रमण को कम करता है

कॉपर एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है, तांबे की बोतलों में 8 घंटे से अधिक समय तक संग्रहीत पानी सभी माइक्रोबियल से मुक्त होता है। कॉपर अन्य सामान्य जलजनित रोग पैदा करने वाले एजेंटों के बीच ई. कोलाई, एस. ऑरियस और हैजा बेसिलस के खिलाफ प्रभावी है।

थायराइड ग्रंथि के कार्य में सहायता करता है

विशेषज्ञों के अनुसार, थायराइड के रोगियों में सबसे आम विशेषता अगर कुछ है तो वह तांबा है। कॉपर थायरॉयड ग्रंथि की विसंगतियों को संतुलित करता है, थायरॉयड ग्रंथि को अच्छी तरह से काम करने के लिए सक्रिय करता है, लेकिन यह थायरॉयड ग्रंथि से बहुत अधिक स्राव के हानिकारक प्रभावों से भी लड़ता है। जहां तांबे की कमी से थायरॉयड ग्रंथि खराब हो जाती है, वहीं यह भी सच है कि बहुत अधिक तांबा भी थायरॉयड ग्रंथि की शिथिलता का कारण बनता है, जिससे रोगियों में हाइपर या हाइपोथायरायडिज्म होता है।

तांबे के बर्तन के फायदे : स्ट्रोक रोकता है

कॉपर में ऐंठन-रोधी गुण भी होते हैं, जिसका अर्थ है कि कॉपर दौरे को रोकने का एक प्रभावी साधन है। तांबे में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं, जिसका अर्थ है कि तांबे की कमी से ऑक्सीडेंट्स तेजी से और बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

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रात के समय क्या नहीं खाना चाहिए? – Gharelu Nuske

अगर आप एक दिन खाना ना खाए तो क्या होता है?

क्या आप जानते हैं कि अगर आप एक दिन खाना नहीं खाएंगे तो इस बात का आप पर क्या असर होगा। यदि नहीं तो आइए बताते हैं कि एक दिन खाना न खाने पर क्या होता है।

भोजन हर एक व्यक्ति की आधारभूत आवश्यकता है क्योंकि बिना भोजन के एक सामान्य व्यक्ति ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह सकता है। वैसे भी खाना पीना तो सिर्फ किसी मजबूरी की वजह से ही बंद होता है, फिर चाहे वह गरीबी हो या बीमारी। परंतु आजकल के समय में डाइटिंग का चलन बहुत बढ़ रहा है इसलिए लोग खाना बहुत ही कम खाते हैं। परंतु एक शोध के अनुसार कोई भी स्वस्थ व्यक्ति कई दिनों तक खाना खाए बगैर रह सकता है। हालांकि लंबे समय तक भूखा रहने से शरीर में आवश्यक तत्वों की कमी हो सकती हैं।

एक दिन भोजन न खाने के फायदे

किंतु एक दिन बिना खाना खाए आप आसानी से रह सकते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि एक दिन ना खाने की वजह से आपको थोड़ी बहुत परेशानी हो या फिर बिल्कुल ही ना हो। क्योंकि इस बात का असर हर व्यक्ति की सेहत और मनोदशा पर निर्भर करता है। लेकिन आपको इस बात से हैरानी जरूर होगी कि मात्र एक दिन का भोजन छोड़ देने पर आपको बहुत से फायदे भी मिल सकते हैं। चलिए करते हैं, चर्चा कि एक दिन भोजन न खाने पर आपको क्या फायदे और नुकसान हो सकते हैं।

आंतरिक शुद्धिकरण

यदि आप हर रोज पेट में खाना ही डालते रहेंगे तो भला शरीर के पुर्जों को आराम कब मिलेगा। इसलिए एक दिन भूखे रहना सेहत के लिहाज से बिल्कुल उत्तम है क्योंकि यह शरीर के आंतरिक शुद्धिकरण के लिए आवश्यक है। आंतरिक शुद्धिकरण की इस प्रक्रिया द्वारा शरीर में जमा हुए सभी विषैले तत्व की निकासी हो जाती है।

पाचन प्रक्रिया के लिए लाभदायक

अगर आप पेट की किसी भी बीमारी यानी कि गैस, कब्ज या एसिडिटी आदि से परेशान है। तो सप्ताह में सिर्फ 1 दिन भूखे रहकर आप अपना इलाज खुद ही कर सकते हैं। हालांकि जरूरी नहीं कि आप पूरा दिन ही भूखे रहे लेकिन आप कुछ फलों का सेवन जरूर करें।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल

सप्ताह में सिर्फ एक दिन भूखा रहकर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम करने में मदद मिलती है। इस प्रकार ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल से संबंधित सभी स्वास्थ्य समस्याएं पूर्णता खत्म की जा सकती हैं।

एक दिन भूखा रहने के डायबिटीज के मरीज पर प्रभाव

एक दिन बिना खाना खाए रहने के फायदे ज्यादा और नुकसान बेहद ही कम है। परंतु फिर भी डायबिटीज के मरीजों को बिना खाना खाए रहने की सलाह बिल्कुल भी नहीं दी जाएगी। ऐसे मरीजों में शुगर का लेवल कम होने पर गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है। 

गंभीर बीमारी से ग्रस्त

माना कि 1 दिन भूखा रहने के ढेरों फायदे हैं परंतु फिर भी किसी भी गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को भूखा नहीं रहना चाहिए। साथ ही भूखा रहने पर चिड़चिड़ापन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।

रात के समय ये नहीं खाना चाहिए

अच्छे स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम और उपचार पर आयुर्वेद जोर देता है। यह उपचार एक आंतरिक शुद्धिकरण प्रक्रिया के साथ शुरू होता है, इसके बाद एक विशेष आहार, हर्बल उपचार, मालिश चिकित्सा, योग की ओर ध्यान देता है।

आयुर्वेद के अनुसार रात के समय क्या नहीं खाना चाहिए?

आपको तो पता ही है आयुर्वेद का मुख्य कार्य मनुष्य के सेहत को ठीक रखना है। एक वक्त था। जब आयुर्वेद ही हर बीमारी का इलाज करता था। लेकिन आज बदलते वक्त के साथ इलाज के तरीके बदल चुके हैं। लेकिन आज भी कहीं ना कहीं आयुर्वेद बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। गंभीर से गंभीर रोग को ठीक करने में।

आयुर्वेद के अनुसार कुछ नियम बनाए गए हैं। जैसे कि रात में बहुत सारी चीजों का सेवन, आयुर्वेद के अनुसार करने से आप बीमार पड़ सकते हैं। आइए उन चीजों के नाम जानते हैं। जिनका सेवन करने से आपके शरीर को खतरा हो सकता है।

दही ना खाएं

आयुर्वेद के अनुसार सूरज ढल जाने के बाद व्यक्ति को कभी भी दही नहीं खाना चाहिए। दही शाम के बाद या रात में खाने से व्यक्ति को सर्दी, जुखाम या ठंड लगने की समस्या हो सकती है।

ठंडा दूध बिल्कुल भी ना पिएं

रात में सोने से पहले बहुत सारे लोग दूध पीकर फिर सोते हैं। दूध पीने की आदत बुरी नहीं है। आप पी सकते हैं। लेकिन जब भी आप रात में सोने से पहले दूध पिएं। तो उसे अच्छे से गर्म करके ही पिए।

ठंडा दूध पीकर सोने से आपके सेहत को हानि पहुंच सकती है। ठंडा दूध शरीर में जाकर पचने में बहुत देर लगाता है। इसलिए आयुर्वेद गर्म दूध पीने की सलाह देता है। ताकि आपको उस दूध को पचाने में कोई कठिनाई न हो।

डिनर में फास्ट फूड का सेवन ना करें

बहुत सारे लोगों को बाहर का खाना बहुत पसंद होता है। फास्ट फूड खाना सेहत के लिए हानिकारक है। इसलिए रात में कभी भी आयुर्वेद के अनुसार ऐसा कोई भी खाना खाकर नहीं सोना चाहिए। जिसमें अत्यधिक मसाला, तेल हो। प्रोटीन वाला खाना ही खाकर रात में सोना चाहिए। इससे आपको एसिडिटी नहीं होगी।

खाना चबाकर खाना चाहिए

यदि आपको मोटापे की समस्या है तो रात में हमेशा कम खाना खाइए। जब भी रात में खाना खाएं उस खाने को रात में चबाचबा कर खाइए। ताकि आपका खाना पच सकें।

खाना भी गर्म करके खाएं

रात का खाना बहुत ही महत्वपूर्ण खाना होता है। जब भी आप रात में खाना खाएंगे। उस खाने को अवश्य ही  अच्छे से गर्म करके खाएं। फ्रीज का खाना डायरेक्ट बिल्कुल भी ना खाएं। इससे आपके शरीर में बीमारी फैल सकती है।

धीरे-धीरे पानी पीना चाहिए

वैसे तो खाना खाते वक्त बिल्कुल भी पानी नहीं पीना चाहिए। लेकिन फिर भी यदि आपको खाना खाने के दौरान तीखा लग जाएं या पानी पीने का मन करें। तो गटक के एक बार में पानी ना पीकर धीरे-धीरे पानी पीना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार रात में दिन में भी खाना खाने से आधे घंटे पहले पानी पीना चाहिए। खाना खाने के तुरंत बाद पानी बिल्कुल भी नहीं पीना चाहिए। इससे शरीर में मोटापा बढ़ता है।

इन सभी बातों के अतिरिक्त हम आपको बताना चाहेंगे कि आयुर्वेद के अनुसार दूध के साथ कभी भी फल को नहीं खाना चाहिए। यह शरीर के लिए बहुत जहरीला होता है।

आज कल लोग मैंगो शेक, मिल्क शेक बनाकर पीते हैं। जिसमें फल का उपयोग किया जाता है। इस शेक को पीने से बचें क्योंकि ऐसा करके आप अपने शरीर के साथ ही खिलवाड़ कर रहे है।